तारीफों के पुल के नीचे,मतलब की नदियाँ बहती हैं: अमीर हाशमी

तारीफों के पुल के नीचे,मतलब की नदियाँ बहती हैं। – अमीर हाशमी

लता मंगेशकर की मौत पर छींटकशी: विश्वादीप ज़ीस्त

एक बार फिर से वही सब कुछ हो रहा है। किसी महान व्यक्तित्व की मौत के तुरंत बाद उस पर वैचारिकता के आधार पर छींटाकशी। यही हमने अटल बिहारी वाजपेयी के वक़्त देखा था, यही हमने डॉ. राहत इंदौरी के वक़्त देखा था, और अब यही हम लता मंगेशकर के वक़्त देख रहे हैं। अगरContinue reading “लता मंगेशकर की मौत पर छींटकशी: विश्वादीप ज़ीस्त”

बिलासपुर के हिदायत अली “कमलाकर”

जितने अच्छे कवि थे उतने ही अच्छे इंसान थे हिदायत अली ‘कमलाकर’ जी। वे हमारे शहर की गंगा-जमुनी संस्कृति की पहचान रहे हैं। उनकी कृति “किसना मोहे तारो” को लेकर उन्हें मैं बिलासपुर के रहीम खानखाना की उपाधि दूं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। भारतेंदु साहित्य समिति में मेरी मुलाकात उनसे हुई।इसके बाद अनेक वर्षोंContinue reading “बिलासपुर के हिदायत अली “कमलाकर””

Does Rajeev Gandhi’s “The Ganga Action Plan 1986” Failed?

In India, rivers are the lifeline and the primary source of drinking, agricultural and industrial water. It flows through villages, towns, and cities and nourishes the land. Rivers also carry the dirt of towns and cities. Uneven urbanization, industrialization, and ignorance are contaminating our rivers. Thus the lifeline gets transformed into a deadline. A similarContinue reading “Does Rajeev Gandhi’s “The Ganga Action Plan 1986” Failed?”

Tom Alter on the “Feminist movement”

It seems Tom Alter whose 3rd death anniversary falls next week, had a lot to say about a diverse array of issues: “mental bankruptcy regarding cultural matters”, “politics of reservation”, “the feminist movement”. The other day Dr Ather Farouqui posted excerpts from his English translation of Mr Alter’s autobiography originally written in Urdu. Sadly, theContinue reading “Tom Alter on the “Feminist movement””

बार-बार देखता हूँ आईना सिर्फ इसलिए

बार-बार देखता हूँ आईना सिर्फ इसलिए,अंदर जो टूटा है कहीं बाहर दिखता तो नहीं.~ अमीर हाशमी Baar-baar dekhta hu aaina sirf isliye,Andar jo toota hain kahi bahar dikhta to nahi.~ Amir Hashmi https://t.co/z1DEwG6jQD

हबीब तनवीर से मिली छत्तीसगढ़ को पहचान

आज़ादी के दो-तीन दशक बाद छत्तीसगढ़ के दिग्गज नेता दुनिया से जा चुके थे, और मध्यप्रदेश में जुड़े होने की वजह से हिंदी भाषा हावी हो गयी थी, ऐसे में छत्तीसगढ़ी भाषा को तुच्छ समझा जाने लगा था. गांव में तो छत्तीसगढ़ी बोली जाती थी, लेकिन उसी गांव के किसी युवा की नौकरी यदि शहरोंContinue reading “हबीब तनवीर से मिली छत्तीसगढ़ को पहचान”

छत्तीसगढ़ बना देश सबसे स्वच्छ राज्य, मुख्यमंत्री ने महिलाओं को दिया श्रेय

छत्तीसगढ़ को स्वच्छ अमृत महोत्सव कार्यक्रम में सबसे स्वच्छ राज्य की श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों अवार्ड ग्रहण किया. इस सम्मान समारोह में प्रदेश के सर्वाधिक 67 नगरीय निकायों को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन केContinue reading “छत्तीसगढ़ बना देश सबसे स्वच्छ राज्य, मुख्यमंत्री ने महिलाओं को दिया श्रेय”

क्या सोच रहे थे अब तक हम, क्या बात हक़ीक़त निकली है: खंडहर फ़िल्म की शायरी

क्या सोच रहे थे अब तक हमक्या बात हक़ीक़त निकली हैजो देखा मैंने अभी-अभीवो बात तो सारी पिछली है अब आँख खुली बरसो में मेरीक्या वाकई सच है जान गयाहै जीना उसका जीना बसजो मिट्टी को रब मान गया कभी नदिया पर्वत बीहड़ हैकभी बर्फ से ढका हिमाला हैकिसी घर के दीपक बुझने सेतेरे-मेरे घरContinue reading “क्या सोच रहे थे अब तक हम, क्या बात हक़ीक़त निकली है: खंडहर फ़िल्म की शायरी”

My Musings on Gandhi: Anand Bahadur

What is Gandhi’s greatest gift? He made the British go away, made them feel ashamed of themselves as the greatest champions of human values. They were so ashamed it was a coloured person born in a heathen, uncivilized and non-Christian country, who was considered the greatest champion of all that is most glorious and worthyContinue reading “My Musings on Gandhi: Anand Bahadur”

चैप्लिन का गांधी – दो धुवों का मिलाप

– 1931 में गोलमेज़ सम्मेलन के सिलसिले में महात्मा गांधी लंदन पहुंचे थे। संयोग से चार्ली चैप्लिन भी तब वहीं थे। गांधी जी से उनकी भेंट हुई। – ये दोनों एक-दूसरे से सर्वथा भिन्न थे। गांधीजी तो सिनेमा भी नहीं देखते थे। किंतु इन दो विलक्षण व्यक्तित्वों की यह मुलाक़ात विश्व-कल्पना में सजीव बनी हुईContinue reading “चैप्लिन का गांधी – दो धुवों का मिलाप”

खान बहादुर औलाद हुसैन द्वारा 1887 में बसाया गया था दुर्ग जिला

ReferenceCENTRAL PROVINCES DISTRICT GAZETTEERSGAZETTEERS Durg District 1910VOLUME AEDITED BY A. E. NELSON’ I.C.S. दुर्ग जिले का इतिहास दुर्ग जिला 1 जनवरी 1906 से है। रायपुर और जिले का गठन दोनों। बिलासपुर जिले, जो एक साथ 20000 वर्ग मील के क्षेत्र को कवर करते हैं और 25 लाख लोगों की आबादी को शामिल करते हैं, जिसेContinue reading “खान बहादुर औलाद हुसैन द्वारा 1887 में बसाया गया था दुर्ग जिला”

तानवट-नवापारा जंगल सत्याग्रह

1930 में महात्मा गांधी ग्रामीण कांग्रेस को संगठित करने में लगे थे। “गांधी टोपी” प्रतीक बन चुकी थीं स्वतंत्रता के सिपाही और कांग्रेस का प्रभाव बढ़ रहा था। पुलिस का अत्याचार और लूट खसोट तानवर-नवापारा इलाके में बढ़ गया। शहरी क्षेत्रों में तो बड़े नेताओं के दबाव और भय के कारण ब्रिटिश पुलिस संयम बरततीContinue reading तानवट-नवापारा जंगल सत्याग्रह

Criticize Gandhi based on logic: Amir Hashmi

“If it is necessary to use words like globalization, free markets, privatization, and liberalization in defining the 21st century, then it is also imperative that words like violence, extremism, inequality, poverty, and inequality are not ignored. If one question the relevance of Gandhi and his ideology even in the presence of violence, extremism, poverty, andContinue reading “Criticize Gandhi based on logic: Amir Hashmi”

‘अपने’ ज़्यादा हों तो, आस्तीनों में गुंजाइश रख दूं: अमीर हाशमी

नाप लेता है मेरा दर्ज़ी, तो पूछा करता है मुझसे,‘अपने’ ज़्यादा हों तो, आस्तीनों में गुंजाइश रख दूं. -अमीर हाशमी

सिर्फ इश्कवालों की यादें गुलजार क्यूं हैं: एजाज़ मंसूरी

दुनिया इन्कार करती है फिर भी तलबगार क्यूं है,ये इश्क इतना असरदार क्यूं है खाक मे मिल चुकी है हर शय फानी हैसिर्फ इश्क के दुनिया मे मजार क्यूं है अजिमोशान शहंशाहों को भुला चुकी है दुनियासिर्फ इश्कवालों की यादें गुलजार क्यूं हैं फकिरी मे गुजरते देखी है इश्कवालों की जिंदगीफिर भी साहिलों की यहांContinue reading “सिर्फ इश्कवालों की यादें गुलजार क्यूं हैं: एजाज़ मंसूरी”

यूँ तो आते हैं मुझको हर साल

यूँ तो आते हैं मुझको हर साल बहुत से पैग़ाम लेकिन,इंतेज़ार अब भी मुझे उस एक शक़्स का होता हैं. Yu to aate hian mujhko har saal bhut se paigham lekin, Intezar ab bhi mujhe us ek shakhs ka hota hain. – Amir Hashmi

Dilip Kumar and Siara Banu, Till Death do us apart

#DilipKumarTribute #amirhashmi What a heart-wrenching picture this is. Of Saira Banu in her grief. Unmindful of the mourners who came to pay their last respects to Dilip Kumar and then stayed on to take mobile photos, and the intrusive paparazzi, she showed how true love can only lead to a broken heart when one ofContinue reading “Dilip Kumar and Siara Banu, Till Death do us apart”

How to Saver Rivers in Hindi

Rivers are dumped with various wastes such as household, industrial,etc. It is very important to check that the wastes are treated properly before discharging into the rivers. Oil spills from the vehicles or heavy industries should not be allowed to get discharged into the rivers. Strict water laws should be there. Fortunately, you can do your part to save the rivers byContinue reading “How to Saver Rivers in Hindi”