देश दहला है, जिम्मेदार सिर्फ सर झुकाए खड़े हैं

ये आप सभी के लिए महज एक खबर हो सकती है, पर असल में यह सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है कि वह अब तक इन आतंकी हमलों को रोक नहीं पा रही है.अब सरकार सिर्फ शोक जता कर कड़ी निंदा कर इस मामले को दबाने की कोशिश भी कर सकती है.सरकार के हुक्मरानों की आंखों में गुस्सा होगा सिर्फ दिखाने मात्र को.वर्तमान मे सिर्फ मुद्दा रह गया है भड़काओ, राज करो. और देश मे इसी रणनीति के तहत चुनाव लड़ा जा रहा है. एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप की राजनीति हो रही है, कौन चोर है कौन पुलिस है. राम मंदिर कौन बनाये गा, दलित हिंदू मुस्लिम के बीच मतभेद और जहर घोलने की साजिश. क्या हमारे देश में बहस के लिए ये ही मुद्दा बच गया है. या सरकार इन सब मुद्दे को लेकर जनता को बर्गलाने की कोशिश कर रही है. आज जम्मू कश्मीर में हुये हमले में 40 जवान शहीद हो गए कई अब भी घायल है संख्या और बढ़ सकती है और शायद सरकार और राजनैतिक दल भी संख्या ही गिन रहे होंगे. सियासी योद्धाओं के निंदा अतिनिन्दा वाले बयान टाइप हो रहे होंगे. आज की घटना पहली घटना नहीं है जब प्रधानमंत्री ने शोक प्रकट किया हो.

18 सितंबर, 2016 को जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास स्थित भारतीय सेना के कैम्प पर हमला किया गया था. इस हमले में 19 जवान मारे गए थे. इस हमले को दो दशकों का सबसे बड़ा हमला बताया गया. इस हमले में भी शोक प्रकट किया गया था.
जनवरी, 2016 को चरमपंथियों ने पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हमला किया था. इसमें 7 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे इस पर भी शोक प्रकट किया गया ऐसे ही गुरुदास हमला अमरनाथ जाने वाले यात्रियों पर हमला हुआ इस पर भी कड़ी निंदा कर दी गई और काम खत्म हुआ. अब सवाल ये है
की भारत सरकार अमेरिका और इसराइल की तरह सिक एंड डिस्ट्रॉय ( ढूंढो और मारो ) की नीति क्यो नहीं अपना पा रहा है ?
मोदी जी ने जी-20 समिट में आतंक के खिलाफ प्लान ऑफ एक्शन के लिए 10 सूत्रीय एजेंडा प्रस्तुत किया था उसका क्या हुआ ?
अमेरिका और दूसरे देश आतंकवादी संगठन के खिलाफ अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करते है भारत क्यो नहीं?
भारत में आतंकवाद के खिलाफ अब तक कोई कानून क्यों नहीं बनाया गया ?
ये बहुत जरूरी है की अंतरराष्ट्रीय दबाव की परवाह किये बैगर सरकार को भारत की आवाम के लिए इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाना होगा और जुमलों को छोड़ वास्तविक स्थितियों पर बात करनी होगी.
आज एक सवाल भारत के सर्वोच्च सदन में बैठे नेताओं से भी है कि संसद में कश्मीर मुद्दे पर क्या बहस हुई और क्या समाधान निकले आपके राफेल और राममंदिर की बहस में न जाने।कितनी माँओ की गोद सुनी हो गई,न जाने कितनी बहुओं का सुहाग उजड़ गया,पिता के सपने कुचल दिए गए इसके जिम्मेदार सरकार और सदन में बैठा हर सांसद है. आज देश अपनों खोने का दर्द महसूस कर पा रहा होगा. सीमा पर लड़ते-लड़ते हमारे जवान दिन-प्रतिदिन शहीद हो रहे हैं. सफेद पोशाक में बैठे हुक्मरान और विपक्ष में बैठे लोग क्या इतने बेबस और लाचार हो चुके हैं जो आज तक जवाब नहीं दे पा रहे हैं. आखिर हमारी सरकार किस से डर रही है उनसे जो हमारे लोगों को मार रहे हैं.

Ruchi ki kalam se.

Published by Amir Hashmi

Amir Hashmi is an Indian Film Producer, Director, Writer, and Actor awarded the ‘Film excellence award’ by the Ministry of Information and Broadcasting, Govt. of India. Apart from being an artist, he is an outstanding speaker who hosted hundreds of inspiring workshops and campaigns amongst the youth. Awarded ‘Sangeet Visharad’ in Hindustani classical singing. He consistently promotes culture, humanity, and morality, and believes in truth and non-violence, besides being known for his environmental and patriotic initiatives.

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