मुझको तेरी रूह चाहिए…

मुब्तिला-ए-ईश्क़ है “अमीर” इसे राह चाहिए,
जिस्म सिर्फ़ है जिस्म, मुझको तेरी रूह चाहिए.
#अमीरहाशमी की कलम से…

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