आओ ज़रा तुमसे मुहब्बत करें…

आओ ज़रा तुमसे मुहब्बत करें,
बहुत दिन से ग़ज़ल लिखीं नहीं,

बड़ा मतलबी है दिल इस शायर का,
ईश्क़ चाहिये कलम की स्याही के लिए.

#अमीरहाशमी की कलम से…


Aao zara tumse muhabbat kare,
Bahut dino se ghazal likhi nahi,

Badaa matalabi hain dil is shayar ka,
Ishq chahiye kalam ki syaahi ke liye.

#amirhashmi ki kalam se…


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