दौर-ए-जाहीलिया / शऊर-ए-रुआब

जीने का शऊर है जिन्हें अमीर, तंगदस्ती में है वो तुर्क,

जो जीते है मौज से सूदखोर, उन्हें शऊर-ए-रुआब नहीं

दौर-ए-जाहीलिया

#अमीरहाशमी की कलम से…

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