इश्क़ के पायदान पर सोचा था चलेंगे कदम दर कदम… 

इश्क़ के पायदान पर सोचा था चलेंगे कदम दर कदम,

ये क्या कि उनके हुस्न पे अमीर, तुम इश्क़ ही कर बैठे

 

ना कि अकीदत, ना उंसीयत ही थी तुमको मगर,

ये क्या कि तुम तो सीधे उनपर दिल ही दे बैठे

 
अब तमाशा ही बनेगा जो हज़रत-ए-इश्क़ ने घेरा है

ये क्या कि सेज-ए-हीर पे सोने की ज़िद कर बैठे

 
सफ़र हमसफ़र से होता है तय बदस्तूर मगर,

ये क्या कि तुम क़ातिल को हमसफ़र कर बैठे

 
सुहागन हो जो अगर तो खयाल करता है हमसफर,

आशिकों के चीथड़े मिलते है, हाय ये क्या कर बैठे

#अमीरहाशमी की कलम से… 

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