आसमान पर बैठकर अक्सर… 

आसमान पर बैठकर अक्सर फेकता हूँ कंकरियां मैं ज़मीन पर,
बस यहीं मिजाज़ है मेरा देखता हूँ फिर तमाशा उसकी चोट का.

#अमीरहाशमी की कलम से….

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